पाचन के लिए योग: एक सौम्य, व्यावहारिक गाइड

An infographic showing six gentle yoga poses for digestive health: Sukhasana, Cat-Cow, Child's Pose, Wind-Relieving Pose, a reclined twist and Cobra Pose, each with a brief benefit
Text:

भूमिका

पाचन की सेहत सिर्फ़ खाने पर निर्भर नहीं करती।

हम क्या खाते हैं, कितने नियम से खाते हैं, कितना चलते-फिरते हैं, नींद कैसी है और तनाव में हमारा तंत्रिका तंत्र कैसी प्रतिक्रिया देता है, इन सबका असर पाचन पर पड़ता है। कई लोगों को तनाव, सुस्ती, बिगड़ी दिनचर्या या कम नींद के दिनों में पेट की तकलीफ़ ज़्यादा महसूस होती है।

योग में शारीरिक हलचल, साँस, शिथिलता, शरीर के प्रति सजगता और ध्यान, सब एक साथ आते हैं। इसलिए यह एक स्वस्थ जीवनशैली का अच्छा हिस्सा बन सकता है।

पर उम्मीदें सही रखना ज़रूरी है।

योग डॉक्टरी निदान या इलाज की जगह नहीं ले सकता। कोई एक आसन एसिडिटी, IBS, कब्ज, आंतों की सूजन वाली बीमारी (IBD) या पाचन की किसी दूसरी बीमारी को भरोसे के साथ “ठीक” नहीं कर सकता। हाँ, सही ढंग से किया गया योग शारीरिक सक्रियता, शिथिलता, साँस और तनाव प्रबंधन में मदद करके डॉक्टरी इलाज और अच्छी दिनचर्या का साथ दे सकता है।

इसलिए मकसद पाचन के लिए कोई “जादुई आसन” ढूँढना नहीं है।

मकसद है एक ऐसा अभ्यास बनाना जो लंबे समय तक निभ सके और जिससे शरीर और मन मिलकर ठीक से काम करें।

योग पाचन में कैसे मदद कर सकता है?

पाचन तंत्र और तंत्रिका तंत्र आपस में गहराई से जुड़े हैं।

जब हम तनाव में, चिंता में, हड़बड़ी में या लगातार किसी न किसी उत्तेजना में रहते हैं, तो शरीर ज़्यादा “चौकन्नी” अवस्था में बना रह सकता है। इसका असर भूख, खाने के तरीके, शौच की आदत, पेट में होने वाले एहसासों और बेचैनी को महसूस करने के ढंग पर पड़ सकता है।

योग के कई पहलू यहाँ मददगार हो सकते हैं।

1. हल्की हलचल

नियमित शारीरिक गतिविधि पूरी सेहत के लिए अच्छी है। इससे शौच की आदत ठीक रखने और लंबे समय तक बैठे रहने के बुरे असर कम करने में मदद मिल सकती है।

योग दिन में हलचल शामिल करने का एक तरीका है।

2. साँस

धीमी, आरामदायक साँस से शरीर शिथिल होता है, और अपनी साँस के ढर्रे और शरीर के एहसासों के प्रति सजगता बढ़ती है।

जिन लोगों को तनाव में पेट की तकलीफ़ ज़्यादा महसूस होती है, उनके लिए साँस के अभ्यास ख़ास तौर पर उपयोगी हो सकते हैं।

3. शिथिलता

कई योग अभ्यासों में जान-बूझकर आराम और शिथिलता के पल रखे जाते हैं।

इससे शरीर लगातार भाग-दौड़ वाली अवस्था से निकलकर शांत अवस्था की ओर जा सकता है।

4. शरीर के प्रति सजगता

योग शरीर के एहसासों पर ध्यान देना सिखाता है। इससे आप इन बातों को पहचान सकते हैं:

  • बहुत जल्दी-जल्दी खाना
  • पेट में कसाव
  • उथली साँस
  • तनाव से जुड़ी बेचैनी
  • थकान
  • शरीर पर ज़रूरत से ज़्यादा ज़ोर
  • बेचैनी और दर्द के बीच का फ़र्क

5. नियमितता

शायद सबसे बड़ा फ़ायदा आदत से जुड़ा है।

कभी-कभार किया गया कठिन अभ्यास उतना काम का नहीं होता, जितना एक छोटा-सा नियमित अभ्यास जिसे आप आराम से रोज़ निभा सकें।

योग और आंत-दिमाग़ का रिश्ता

पाचन के लक्षण और मन की अवस्था एक-दूसरे पर असर डालते हैं।

दिमाग़ और पाचन तंत्र के इस रिश्ते को अक्सर गट-ब्रेन कनेक्शन या गट-ब्रेन एक्सिस कहा जाता है।

तनाव का मतलब यह नहीं कि पेट की तकलीफ़ “मन का वहम” है।

पेट फूलना, पेट में बेचैनी, शौच की आदत में बदलाव, एसिड रिफ्लक्स और पाचन की दूसरी शिकायतें पूरी तरह असली हो सकती हैं। साथ ही, तनाव और भावनाएँ इस पर असर डाल सकती हैं कि पाचन तंत्र कैसे काम करता है और लक्षण कितने तेज़ महसूस होते हैं।

इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (IBS) जैसी आंत-दिमाग़ के तालमेल की गड़बड़ियों में यह बात ख़ास तौर पर लागू होती है।

योग यहाँ इसलिए उपयोगी हो सकता है क्योंकि इसमें शारीरिक हलचल के साथ साँस और शिथिलता भी जुड़ी है।

इसीलिए पाचन की सेहत को सिर्फ़ खाने के नज़रिए से नहीं देखना चाहिए। एक व्यापक दृष्टिकोण में ये सब शामिल हो सकते हैं:

आहार, हलचल, साँस, नींद, तनाव पर काबू और सही डॉक्टरी देखभाल

इस रिश्ते को और समझने के लिए ये लेख पढ़िए:

शुरू करने से पहले: कुछ ज़रूरी बातें

योग सजगता का अभ्यास है, किसी से होड़ नहीं।

आपका शरीर लचीला होना ज़रूरी नहीं।

कठिन आसन करने की ज़रूरत नहीं।

पैर की उँगलियाँ छूना भी ज़रूरी नहीं।

और पेट को ज़बरदस्ती किसी तकलीफ़देह मुद्रा में ढालने की तो बिल्कुल ज़रूरत नहीं।

एक काम का सूत्र याद रखिए:

पहले आराम, फिर नियमितता, और तीव्रता सबसे आख़िर में।

अगर किसी आसन से दर्द, चक्कर, जी मिचलाना, साँस फूलना या लक्षणों का साफ़ तौर पर बढ़ना हो, तो उसी समय रुक जाइए।

पेट की तकलीफ़ होने पर दर्द सहकर अभ्यास जारी रखना ठीक नहीं।

1. आरामदायक डायाफ्रामिक साँस (पेट से साँस)

पाचन के लिए अभ्यास शुरू करने का सबसे आसान तरीका साँस है।

आराम से बैठ जाइए या लेट जाइए।

अगर इससे साँस पर ध्यान देने में मदद मिले, तो एक हाथ छाती पर और दूसरा पेट पर रखिए।

साँस को धीमा और सहज होने दीजिए। ज़बरदस्ती बहुत गहरी साँस भरने की कोशिश मत कीजिए।

महसूस कीजिए कि साँस के साथ पेट हल्के से ऊपर-नीचे हो रहा है।

अभ्यास

ध्यान रखिए:

  • साँस धीरे भरिए
  • साँस आराम से छोड़िए
  • कोई ज़ोर मत लगाइए
  • साँस रोकिए नहीं
  • एक मिनट में तय संख्या में साँसें पूरी करने की कोई ज़रूरत नहीं

अपनी सहूलियत के हिसाब से लगभग 2 से 5 मिनट तक कीजिए।

यह क्यों?

इसका मकसद “पाचन अंगों की मालिश” करना नहीं है।

आरामदायक साँस से शरीर शिथिल होता है, उसके प्रति सजगता बढ़ती है और बाकी अभ्यास की शुरुआत शांत मन से होती है।

2. मार्जरी-बिटिलासन (कैट-काउ)

मार्जरी-बिटिलासन एक हल्का अभ्यास है, जिसमें रीढ़ बारी-बारी से आगे की ओर गोल होती है और पीछे की ओर झुकती है।

हाथों और घुटनों के बल आ जाइए।

धीरे-धीरे रीढ़ को ऊपर की ओर गोल कीजिए, फिर हल्के से नीचे की ओर झुकाइए।

इस हलचल को सहज रूप से साँस के साथ मिलाइए।

हल्का ही रखिए

जितना हो सके उतना ज़्यादा मुड़ने की ज़रूरत नहीं। इन बातों पर ध्यान दीजिए:

  • रीढ़ की आरामदायक हलचल
  • सहज साँस
  • एक स्थिति से दूसरी में धीरे से जाना
  • पेट और पीठ के प्रति सजगता

लगभग 5 से 10 बार धीरे-धीरे दोहराइए।

पाचन के नज़रिए से

इसे पाचन का कोई ख़ास इलाज नहीं, बल्कि पूरे शरीर की हल्की हलचल समझिए।

शरीर को खोलने वाले छोटे अभ्यास की शुरुआत के लिए यह अच्छा है।

3. बालासन

बालासन कई लोगों के लिए आराम करने की एक सुखद मुद्रा है।

घुटनों के बल बैठिए और धीरे से शरीर को आगे झुकाइए, ताकि माथा ज़मीन की ओर या किसी सहारे की ओर जाए।

अपने शरीर और लचीलेपन के हिसाब से घुटने साथ रख सकते हैं या आराम से थोड़े फैला सकते हैं।

बाँहों को जैसे आराम लगे, वैसे रखिए।

कितनी देर

लगभग 30 से 60 सेकंड, सहज साँस के साथ।

ज़रूरत हो तो तकिए या बोल्स्टर का सहारा ले सकते हैं।

ध्यान रखें

अगर पेट पर दबाव से तकलीफ़ हो, तो मुद्रा बदल लीजिए या आराम की कोई दूसरी मुद्रा चुनिए।

योग व्यक्ति के हिसाब से ढलना चाहिए, व्यक्ति को योग के हिसाब से नहीं।

4. बैठकर हल्का मोड़

बैठकर किया गया हल्का मोड़ रीढ़ को आराम से घुमाता है और शरीर के प्रति सजगता बढ़ाता है।

पैरों को आरामदायक स्थिति में रखकर सीधे बैठिए।

एक हाथ पीछे ज़मीन पर रखिए और दूसरा विपरीत जाँघ या घुटने पर।

बिना ज़ोर लगाए धड़ को धीरे से घुमाइए।

साँस सहज रखिए।

थोड़ी देर रुकिए, बीच में लौट आइए, और फिर दूसरी ओर दोहराइए।

याद रखें

मकसद ज़्यादा से ज़्यादा घूमना नहीं है।

घुटने को ज़ोर से मत खींचिए, और बाँहों के बल पर रीढ़ को और आगे मत धकेलिए।

हल्का खिंचाव या आरामदायक हलचल काफ़ी है।

5. अपानासन: घुटने छाती की ओर

पाचन से जुड़े योग अभ्यासों में अपानासन पारंपरिक रूप से किया जाता रहा है।

पीठ के बल लेट जाइए और सहूलियत के हिसाब से एक या दोनों घुटनों को धीरे से छाती की ओर लाइए।

घुटनों पर ज़ोर डाले बिना इस स्थिति में रुकिए।

सहज रूप से साँस लेते रहिए।

एक आसान बदलाव

अगर दोनों घुटने एक साथ लाना आरामदायक न लगे, तो एक-एक घुटना बारी-बारी से लाइए।

ज़रूरी सावधानी

पेट को दबाने वाली मुद्राएँ हर किसी के लिए ठीक नहीं होतीं। इन स्थितियों में यह आसन बदलकर कीजिए या मत कीजिए:

  • पेट में तेज़ दर्द
  • हाल ही में पेट का ऑपरेशन
  • कुछ तरह के हर्निया
  • गर्भावस्था, जब तक किसी विशेषज्ञ की सलाह से मुद्रा को सही ढंग से बदला न गया हो
  • कोई और स्थिति, जिसमें इस मुद्रा की मनाही की गई हो

6. लेटकर हल्का मोड़

आराम से पीठ के बल लेट जाइए।

घुटने मोड़िए और उन्हें धीरे से एक ओर गिरने दीजिए, बस उतना ही जितना आराम से हो सके।

बीच में लौट आइए और दूसरी ओर दोहराइए।

कंधे ढीले रखिए।

इसका मकसद क्या है?

लेटकर किया गया हल्का मोड़ रीढ़ को लचीलापन और शरीर को आराम देता है।

इसके बारे में यह नहीं कहना चाहिए कि यह “आंतों से टॉक्सिन्स निचोड़ देता है” या पाचन तंत्र को साफ़ कर देता है।

अपशिष्ट को संभालने और बाहर निकालने के लिए शरीर के पास पहले से ही बहुत विकसित व्यवस्थाएँ हैं।

योग सबसे अच्छा तब काम करता है जब हम यह समझें कि वह असल में क्या कर सकता है।

7. सेतुबंधासन

सेतुबंधासन को ज़रूरत के हिसाब से बदलकर योग की दिनचर्या में शामिल किया जा सकता है।

घुटने मोड़कर पीठ के बल लेट जाइए और पैर आराम से ज़मीन पर रखिए।

सहज साँस लेते हुए कूल्हों को धीरे से ऊपर उठाइए।

फिर धीरे-धीरे नीचे आइए।

हलचल पर नियंत्रण रखिए

जितना हो सके उतना ऊँचा उठाने की ज़रूरत नहीं।

गर्दन पर ज़ोर मत डालिए और साँस मत रोकिए।

अगर पीठ, गर्दन, कूल्हे या मांसपेशियों-हड्डियों की कोई और समस्या है, तो यह आसन जोड़ने से पहले सही सलाह लीजिए।

सेतुबंधासन शरीर की सामान्य हलचल और मज़बूती का अभ्यास है, पाचन की किसी बीमारी का ख़ास इलाज नहीं।

8. आगे की ओर हल्का झुकना

आगे की ओर आराम से झुकना शिथिलता वाले अभ्यास का हिस्सा हो सकता है।

ज़ोर ज़मीन छूने पर नहीं, शरीर को ढीला छोड़ने पर होना चाहिए।

बैठकर कर रहे हैं, तो ज़रूरत हो तो घुटने मोड़ लीजिए।

धड़ को बस उतना ही आगे जाने दीजिए जितना आराम से जा सके।

ख़ुद को खींचकर और गहरे झुकने की कोशिश मत कीजिए।

जिन्हें एसिड रिफ्लक्स है

कुछ लोगों को आगे झुकने या कुछ ख़ास तरह से लेटने पर एसिड रिफ्लक्स के लक्षण बढ़ते महसूस होते हैं।

अगर किसी मुद्रा से सीने में जलन, खट्टा पानी ऊपर आना, जी मिचलाना या बेचैनी बढ़े, तो उसे बदल दीजिए या छोड़ दीजिए।

तय क्रम का पालन करने से ज़्यादा ज़रूरी है कि आपका शरीर कैसी प्रतिक्रिया दे रहा है।

9. आराम से टहलना

टहलना तकनीकी रूप से योगासन नहीं है, पर पाचन की दिनचर्या में इसकी जगह ज़रूर बनती है।

नियमित शारीरिक गतिविधि अच्छी सेहत का अहम हिस्सा है।

अगर आरामदायक लगे, तो खाने के बाद धीरे-धीरे टहलना ख़ास तौर पर उपयोगी हो सकता है। बस, अगर खाने के तुरंत बाद मेहनत वाले व्यायाम से तकलीफ़ होती हो, तो उससे बचिए।

थोड़ी-सी हलचल भी लंबे समय तक लगातार बैठे रहने के सिलसिले को तोड़ देती है।

योग और टहलने को एक-दूसरे का विकल्प नहीं, साथी समझिए।

10. शवासन में विश्राम

अभ्यास का अंत शवासन या किसी आरामदायक विश्राम मुद्रा से कीजिए।

लेट जाइए या सहारा लेकर बैठ जाइए।

शरीर को स्थिर होने दीजिए।

हर साँस को नियंत्रित करने की कोशिश किए बिना बस साँस को देखते रहिए।

चेहरे, कंधों, पेट और हाथों की मांसपेशियों को ढीला छोड़ दीजिए।

2 से 5 मिनट तक इसी अवस्था में रहिए।

यह आख़िरी हिस्सा अभ्यास को सिर्फ़ कुछ आसनों का संग्रह नहीं रहने देता, बल्कि उसे मन और शरीर, दोनों का अभ्यास बना देता है।

पाचन के लिए 10 मिनट का आसान योग अभ्यास

शुरुआत के लिए घंटे भर की योग क्लास ज़रूरी नहीं। यह हल्का क्रम आज़माइए:

समय अभ्यास
2 मिनट आरामदायक साँस
1 मिनट मार्जरी-बिटिलासन (कैट-काउ)
1 मिनट बालासन या सहारे के साथ विश्राम
2 मिनट बैठकर या लेटकर हल्का मोड़
1 मिनट घुटने छाती की ओर, अगर आराम से हो सके
1 मिनट हल्का सेतुबंधासन
2 मिनट शवासन / विश्राम

इस क्रम को अपने लचीलेपन, लक्षणों, उम्र, फ़िटनेस और सेहत की स्थिति के हिसाब से बदला जा सकता है।

मकसद हर आसन पूरा करना नहीं है।

मकसद यह है कि अभ्यास के बाद आप आराम, सजगता और ठहराव महसूस करें।

सुबह का अभ्यास या शाम का?

आपके लिए सही समय आपकी दिनचर्या और लक्षणों पर निर्भर करता है।

सुबह

सुबह के अभ्यास में इन पर ज़ोर दिया जा सकता है:

  • शरीर को हल्के से खोलना
  • साँस
  • शरीर के प्रति सजगता
  • दिन के लिए तैयार होना
  • एक नियमित दिनचर्या बनाना

एक छोटा-सा क्रम भी काफ़ी हो सकता है।

शाम

शाम के अभ्यास में ज़्यादा ध्यान इन पर हो सकता है:

  • शिथिलता
  • हल्का खिंचाव
  • धीमी साँस
  • मन की भाग-दौड़ को कम करना
  • नींद की तैयारी

अगर आपको एसिड रिफ्लक्स है, तो ध्यान दीजिए कि खाने के बाद लेटने या कुछ ख़ास मुद्राओं से लक्षण बढ़ते हैं या नहीं।

योग का कोई एक “सबसे अच्छा” समय सबके लिए नहीं है।

कब्ज के लिए योग?

कब्ज आम है और इसके कई कारण हो सकते हैं, जैसे:

  • व्यक्ति की ज़रूरत के हिसाब से आहार में फ़ाइबर की कमी
  • पानी और तरल पदार्थ कम लेना
  • शारीरिक गतिविधि कम होना
  • दिनचर्या में बदलाव
  • दवाइयाँ
  • गर्भावस्था
  • कोई अंदरूनी बीमारी
  • आंतों के काम पर असर डालने वाली गड़बड़ियाँ

योग और शारीरिक गतिविधि एक स्वस्थ दिनचर्या के उपयोगी हिस्से हो सकते हैं।

लेकिन कब्ज को अपने आप ऐसी समस्या नहीं मान लेना चाहिए जो सिर्फ़ योग से हल हो जाएगी। एक व्यापक दृष्टिकोण में ये शामिल हो सकते हैं:

आहार, पानी, हलचल, शौच की नियमित आदत, दवाइयों की समीक्षा, और ज़रूरत हो तो डॉक्टरी जाँच

व्यावहारिक मार्गदर्शन के लिए ये लेख देखिए:

पेट फूलने के लिए योग?

पेट फूलना एक लक्षण है, कोई एक बीमारी नहीं। इसके साथ ये बातें जुड़ी हो सकती हैं:

  • जल्दी-जल्दी खाना
  • भारी भोजन
  • कब्ज
  • सोडा और कोल्ड ड्रिंक
  • किसी खाने का न पचना
  • शौच की आदत में बदलाव
  • IBS
  • पाचन की दूसरी समस्याएँ
  • तनाव और आंत-दिमाग़ का आपसी असर

हल्की हलचल और शिथिलता से कुछ लोगों को आराम महसूस हो सकता है।

पर अगर पेट फूलना लगातार है, बढ़ रहा है, तेज़ है या उसके साथ दूसरे चिंताजनक लक्षण हैं, तो योग को डॉक्टरी जाँच की जगह नहीं लेनी चाहिए।

विस्तार से जानने के लिए पेट फूलना: आम कारण और व्यावहारिक उपाय पढ़िए।

एसिडिटी और एसिड रिफ्लक्स के लिए योग?

लोग अक्सर ऐसा कोई आसन ढूँढते हैं जो “एसिडिटी ठीक कर दे”।

ऐसा कोई आसन नहीं है जो सब पर यह काम करे।

रिफ्लक्स वाले व्यक्ति को कुछ आसन आरामदायक लग सकते हैं, तो कुछ से लक्षण बढ़ सकते हैं। ख़ासकर वे मुद्राएँ जिनमें पेट पर ज़्यादा दबाव पड़ता है, आगे झुकना होता है, या जो खाने के तुरंत बाद लेटकर की जाती हैं।

व्यावहारिक तरीका यह है:

  • अगर भारी भोजन के तुरंत बाद व्यायाम से तकलीफ़ होती है, तो उससे बचिए
  • ध्यान दीजिए कि किन मुद्राओं से रिफ्लक्स बढ़ता है
  • साँस सहज रखिए
  • पेट को ज़ोर से दबाने वाली मुद्राओं से बचिए
  • लक्षणों के हिसाब से अभ्यास बदलिए
  • रिफ्लक्स के लक्षण लगातार या ज़्यादा हों, तो डॉक्टर से जाँच करवाइए

और जानकारी के लिए एसिडिटी, सीने में जलन और एसिड रिफ्लक्स पढ़िए।

क्या खाने के बाद योग करना चाहिए?

यह इस पर निर्भर करता है कि अभ्यास कितना तीव्र है और आपका शरीर कैसी प्रतिक्रिया देता है।

धीरे-धीरे टहलना ज़्यादातर लोगों को आरामदायक लगता है।

पर भारी भोजन के तुरंत बाद ज़ोरदार योग अभ्यास शायद आरामदायक न लगे।

अगर आपको रिफ्लक्स या पेट की बेचैनी रहती है, तो समय को लेकर सावधानी से प्रयोग कीजिए।

सामान्य सिद्धांत यह है:

हल्की हलचल और सहज साँस एक बात है, भरे पेट पर ज़ोरदार व्यायाम बिल्कुल दूसरी।

अपने शरीर की सुनिए।

योग, साँस और तंत्रिका तंत्र

योग की सबसे क़ीमती ख़ूबियों में से एक शायद यह है कि वह शारीरिक हलचल और तंत्रिका तंत्र के संतुलन को एक साथ जोड़ता है।

तनाव में लोग अक्सर ये बातें महसूस करते हैं:

  • साँस तेज़ होना
  • मांसपेशियों में तनाव
  • शांत होने में मुश्किल
  • भूख में बदलाव
  • शौच की आदत में बदलाव
  • पेट के एहसासों पर ज़्यादा ध्यान जाना

धीमी साँस और शिथिलता वाला नियमित अभ्यास इन पैटर्न को बेहतर ढंग से पहचानने में मदद कर सकता है।

इसका मतलब यह नहीं कि पाचन का हर लक्षण तनाव से ही होता है।

मतलब बस इतना है कि मन और शरीर एक-दूसरे पर असर डालते हैं, और सेहत की दिनचर्या में दोनों का ध्यान रखा जा सकता है।

प्राणायाम के बारे में क्या?

साँस के अभ्यास क़ीमती हो सकते हैं, पर ज़्यादा तीव्र तकनीकें अपने आप बेहतर नहीं हो जातीं।

पाचन की सामान्य सेहत के लिए शुरुआत इनसे कीजिए:

  • नाक से आरामदायक साँस
  • धीमी साँस
  • सहज, ढीली साँस
  • साँस के प्रति सजगता
  • बेवजह साँस रोकने से बचना

ज़ोरदार साँस वाले अभ्यास या लंबे समय तक साँस रोकना (कुंभक) हर किसी के लिए ठीक नहीं हो सकता।

जिन्हें दिल, फेफड़ों या तंत्रिका तंत्र से जुड़ी कोई समस्या है, जो गर्भवती हैं, या जिनकी कोई और डॉक्टरी स्थिति है, उन्हें उन्नत प्राणायाम शुरू करने से पहले किसी विशेषज्ञ से मार्गदर्शन लेना चाहिए।

सहज, आरामदायक साँस से शुरुआत करना सबसे अच्छा है।

कपालभाति और भस्त्रिका के बारे में क्या?

पारंपरिक योग में साँस की कई तरह की तकनीकें हैं।

कपालभाति और भस्त्रिका जैसे कुछ अभ्यासों में साँस ज़ोर से ली या छोड़ी जाती है।

इन्हें कब्ज, एसिडिटी, पेट फूलना, फ़ैटी लिवर या पाचन की दूसरी बीमारियों का इलाज बताकर पेश नहीं करना चाहिए।

कुछ लोगों के लिए ये अभ्यास ठीक भी नहीं होते।

अगर आप योग में नए हैं या आपको कोई बीमारी है, तो हल्की साँस से शुरुआत कीजिए, और उन्नत तकनीकें ज़रूरत हो तो किसी योग्य प्रशिक्षक की देखरेख में ही सीखिए।

योग कोई डिटॉक्स इलाज नहीं है

सेहत से जुड़े प्रचार में “डिटॉक्स” शब्द बहुत ढीले ढंग से इस्तेमाल होता है।

आपने ऐसे दावे देखे होंगे कि कुछ आसन:

  • टॉक्सिन्स निकाल देते हैं
  • आंतों को साफ़ कर देते हैं
  • लिवर को धो डालते हैं
  • किसी ख़ास अंग से गंदगी बाहर निकाल देते हैं
  • पाचन की बीमारियाँ ठीक कर देते हैं

ऐसे दावों पर सावधानी से भरोसा कीजिए।

लिवर, गुर्दे, पाचन तंत्र, फेफड़े और शरीर की दूसरी प्रणालियाँ चयापचय (मेटाबॉलिज़्म) और अपशिष्ट बाहर निकालने का जटिल काम पहले से ही करती हैं।

योग स्वस्थ आदतों और अच्छी सेहत को सहारा दे सकता है।

यह अपने आप में बहुत क़ीमती है।

इसकी अहमियत साबित करने के लिए बढ़ा-चढ़ाकर दावे करने की ज़रूरत नहीं।

योग को पाचन की स्वस्थ दिनचर्या के साथ जोड़िए

योग सबसे अच्छा तब काम करता है जब वह पूरी जीवनशैली का हिस्सा बन जाए। इसके साथ इन बातों को जोड़िए:

1. संतुलित आहार

अपनी ज़रूरत के हिसाब से विविध आहार लीजिए, जिसमें सब्ज़ियाँ, फल, साबुत अनाज या दूसरे उपयुक्त कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और अच्छी वसा सही मात्रा में हों।

देखिए: स्वस्थ पाचन तंत्र की व्यावहारिक गाइड (अंग्रेज़ी में)।

2. पर्याप्त पानी

अपनी ज़रूरत, मौसम, गतिविधि, आहार और सेहत की स्थिति के हिसाब से पानी और तरल पदार्थ लीजिए।

3. नियमित हलचल

टहलना और अपनी फ़िटनेस के हिसाब से दूसरी शारीरिक गतिविधियाँ शामिल कीजिए।

4. नियमित भोजन

खाने का एक नियमित ढर्रा कई लोगों को बेतरतीब खान-पान से बचाने में मदद कर सकता है।

5. ध्यान से खाना

धीरे खाइए। भूख और पेट भरने के एहसास पर ध्यान दीजिए। हो सके तो खाते समय ध्यान भटकाने वाली चीज़ें कम कीजिए। आराम से चबाइए।

6. नींद

नींद और पाचन, दोनों का पूरी सेहत और रोज़ के कामकाज से गहरा संबंध है।

7. तनाव प्रबंधन

साँस, शिथिलता, ध्यान, योग, अपनों से मेल-जोल या कोई भी ऐसा तरीका अपनाइए जिससे आपको तनाव संभालने में सच में मदद मिलती हो।

8. सही डॉक्टरी देखभाल

पाचन के लगातार या चिंताजनक लक्षणों की ठीक से जाँच होनी चाहिए।

कब योग छोड़कर डॉक्टर की सलाह लें?

कुछ लक्षणों में योग पहला कदम नहीं होना चाहिए।

अगर पाचन के लक्षण:

  • तेज़ हैं
  • लगातार बने हुए हैं
  • धीरे-धीरे बढ़ते जा रहे हैं
  • बेवजह हैं

या उनके साथ इनमें से कुछ है:

  • काफ़ी वज़न घटना
  • पाचन तंत्र से ख़ून आना
  • लगातार उल्टी
  • निगलने में तकलीफ़
  • तेज़ बुख़ार
  • पेट का बहुत ज़्यादा फूल जाना
  • शौच की आदत में बड़ा बदलाव
  • बहुत ज़्यादा कमज़ोरी या शरीर में पानी की कमी

तो डॉक्टर से जाँच करवाइए।

सीने में नया, तेज़ या बेवजह दर्द हो, तो उसे सीधे एसिडिटी मानकर योग से ठीक करने की कोशिश मत कीजिए।

अगर पेट में तेज़ दर्द है, कोई गंभीर बीमारी चल रही है, हाल ही में पेट का ऑपरेशन हुआ है, या कोई और ऐसी स्थिति है जिसमें डॉक्टरी देखभाल चाहिए, तो व्यायाम से पहले डॉक्टर की सलाह लीजिए।

सुरक्षा से जुड़ी विस्तृत जानकारी के लिए पाचन के किन लक्षणों में डॉक्टर को दिखाना ज़रूरी है पढ़िए (अंग्रेज़ी में)।

किन्हें ज़्यादा सावधानी रखनी चाहिए?

इन लोगों के लिए योग उनकी स्थिति के हिसाब से तय होना चाहिए:

  • गर्भवती महिलाएँ
  • ऑपरेशन के बाद ठीक हो रहे लोग
  • हर्निया वाले लोग
  • मांसपेशियों या हड्डियों की गंभीर समस्या वाले लोग
  • तेज़ एसिड रिफ्लक्स वाले लोग
  • दिल या फेफड़ों की बीमारी वाले लोग
  • जिन्हें चक्कर आते हैं या संतुलन बनाने में दिक़्क़त होती है
  • तंत्रिका तंत्र की गंभीर बीमारी वाले लोग
  • ऐसी दवाइयाँ लेने वाले लोग जिनसे व्यायाम की क्षमता पर असर पड़ता है
  • किसी जटिल पुरानी बीमारी से जूझ रहे लोग
  • बुज़ुर्ग

इनमें से किसी भी स्थिति में, कोई स्वास्थ्य विशेषज्ञ या योग्य योग शिक्षक आसनों और उनकी रफ़्तार को आपकी ज़रूरत के हिसाब से ढाल सकता है। यह किसी आम, सबके लिए एक जैसी दिनचर्या से कहीं बेहतर है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या कोई ख़ास आसन एसिडिटी, कब्ज या IBS ठीक कर सकता है?

कोई एक आसन पाचन की किसी बीमारी को भरोसे के साथ ठीक नहीं करता। योग हलचल, शिथिलता, साँस और तनाव प्रबंधन के ज़रिए डॉक्टरी इलाज और अच्छी दिनचर्या का साथ दे सकता है, पर डॉक्टरी निदान या इलाज की जगह नहीं ले सकता।

पाचन के लिए योग करने का सबसे अच्छा समय कौन-सा है?

कोई एक समय सबके लिए सबसे अच्छा नहीं है। सुबह के अभ्यास में शरीर को हल्के से खोलने, साँस और नियमितता पर ज़ोर दिया जा सकता है, जबकि शाम का अभ्यास शिथिलता और नींद की तैयारी पर ज़्यादा ध्यान दे सकता है। अगर आपको रिफ्लक्स है, तो देखिए कि खाने के बाद लेटने या कुछ मुद्राओं से लक्षण बढ़ते हैं या नहीं।

क्या खाना खाने के तुरंत बाद योग कर सकते हैं?

धीरे-धीरे टहलना ज़्यादातर लोगों को आरामदायक लगता है, पर भारी भोजन के तुरंत बाद ज़ोरदार अभ्यास शायद ठीक न लगे। अगर आपको रिफ्लक्स या पेट की बेचैनी रहती है, तो समय को लेकर सावधानी से प्रयोग कीजिए और शरीर की प्रतिक्रिया के हिसाब से चलिए।

क्या कपालभाति या भस्त्रिका जैसे प्राणायाम पाचन में मदद करते हैं?

ज़ोरदार साँस वाली इन तकनीकों को कब्ज, एसिडिटी, पेट फूलने या पाचन की दूसरी बीमारियों का इलाज बताकर पेश नहीं करना चाहिए, और ये हर किसी के लिए ठीक भी नहीं होतीं। धीमी, आरामदायक साँस से शुरुआत कीजिए, और उन्नत तकनीकें ज़रूरत हो तो किसी योग्य प्रशिक्षक की देखरेख में सीखिए।

क्या योग से पाचन तंत्र का डिटॉक्स होता है?

नहीं। कुछ आसनों से आंतें साफ़ होने या लिवर धुल जाने जैसे दावों पर सावधानी से भरोसा कीजिए। लिवर, गुर्दे और पाचन तंत्र चयापचय और अपशिष्ट निकालने का जटिल काम पहले से करते हैं। योग अपने आप में स्वस्थ आदतों और अच्छी सेहत को सहारा देता है, उसे बढ़ा-चढ़ाकर दावों की ज़रूरत नहीं।

कब योग रोककर डॉक्टर को दिखाना चाहिए?

अगर पाचन के लक्षण तेज़ हैं, लगातार हैं, बढ़ते जा रहे हैं, या उनके साथ वज़न घटना, ख़ून आना, लगातार उल्टी, निगलने में तकलीफ़, बुख़ार, पेट का बहुत फूल जाना या शौच की आदत में बड़ा बदलाव है, तो डॉक्टर से जाँच करवाइए। सीने में नए या बेवजह दर्द को कभी भी एसिडिटी मानकर योग से संभालने की कोशिश मत कीजिए।

क्या शुरू करने के लिए शरीर का लचीला होना या अनुभव ज़रूरी है?

नहीं। इस गाइड के अभ्यास कठिन आसनों पर नहीं, आराम, नियमितता और धीरे-धीरे आगे बढ़ने पर टिके हैं। पहले आराम, फिर नियमितता, और तीव्रता सबसे आख़िर में।

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चिकित्सा संबंधी अस्वीकरण

यह लेख सामान्य जानकारी और स्वास्थ्य-जागरूकता के लिए है। यह किसी व्यक्ति विशेष के डॉक्टरी निदान, इलाज या विशेषज्ञ सलाह की जगह नहीं ले सकता।

योग अभ्यास व्यक्ति की उम्र, फ़िटनेस, पुरानी बीमारियों, शारीरिक स्थिति, गर्भावस्था, दवाइयों और दूसरी ज़रूरी परिस्थितियों को ध्यान में रखकर चुने और बदले जाने चाहिए।

पाचन के लक्षणों के कई अलग-अलग कारण हो सकते हैं। इस वेबसाइट की जानकारी के भरोसे डॉक्टरी जाँच में देर मत कीजिए, और न ही इसे किसी योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह की जगह इस्तेमाल कीजिए।

अगर तेज़ या बेवजह दर्द, सीने में दर्द, साँस बहुत फूलना, बेहोशी, तंत्रिका तंत्र से जुड़े लक्षण या कोई और चिंताजनक लक्षण हो, तो व्यायाम रोक दीजिए और डॉक्टर से जाँच करवाइए।

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