डॉ. सारंग पाटिल के बारे में
मैं डॉ. सारंग पाटिल हूँ। इंटीग्रेटिव और लाइफस्टाइल मेडिसिन का विशेषज्ञ, शोधकर्ता और स्वास्थ्य शिक्षक। 30 से ज़्यादा साल से मेरा काम इंटीग्रेटिव मेडिसिन और समग्र हीलिंग को एक ही ढाँचे में जोड़ता आया है: पंचकोश मॉडल, जिसे फ़ाइव-डाइमेंशनल हीलिंग भी कहते हैं। यह मॉडल इंसान को पाँच आयामों में देखता है: शरीर, ऊर्जा, मन, समझ और भीतरी शांति। मैं बार-बार एक ही सवाल पर लौटता हूँ: शरीर, मन, व्यवहार और रोज़ की ज़िंदगी को एक-दूसरे से अलग किए बिना सेहत को कैसे समझा और सँभाला जाए?
शिक्षा और चिकित्सा प्रशिक्षण
मेरा शैक्षिक और पेशेवर सफ़र नेचुरोपैथी और योग से शुरू हुआ। इसके बाद मैंने साइकोफ़िज़ियोलॉजी में डॉक्टरेट शोध किया और इंटीग्रेटिव, लाइफस्टाइल, फंक्शनल और माइंड-बॉडी मेडिसिन में आगे का प्रशिक्षण लिया।
- BNYS: SDM कॉलेज ऑफ़ नेचुरोपैथी एंड योगिक साइंसेज़, उजिरे, मंगलौर विश्वविद्यालय के अंतर्गत, 1994 में पूर्ण।
- साइकोफिज़ियोलॉजी में PhD: स्वामी विवेकानंद योग अनुसंधान संस्थान (sVYASA), बेंगलुरु, जनवरी 2007 में पूर्ण। शोध-प्रबंध: “दो योगिक ध्यान तकनीकों के मनो-शारीरिक प्रभावों की तुलना,” डॉ. एच. आर. नागेंद्र और डॉ. शर्ली टेलेस के मार्गदर्शन में।
प्रशिक्षण और प्रमाणपत्र
- IV थेरेपी सर्टिफ़िकेट कोर्स और CME-मान्यता प्राप्त प्रशिक्षण (2025): कैनेडियन बोर्ड ऑफ़ एस्थेटिक मेडिसिन (CBAM), कनाडा
- फंक्शनल न्यूट्रिशन में सर्टिफ़िकेट (iCFN) (2024): iThrive Academy, भारत
- कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी में एग्ज़ीक्यूटिव डिप्लोमा (EDCBT) (2023): सेंटर फ़ॉर हेल्थ मैनेजमेंट एंड रिसर्च, भारत
- फंक्शनल न्यूट्रिशन CME (2022): नवस्त इंस्टीट्यूट ऑफ़ न्यूट्रिशन एंड डायटेटिक्स (NIND), भारत
- ओज़ोन थेरेपी में सर्टिफ़िकेट कोर्स (2022): ओज़ोन फ़ोरम ऑफ़ इंडिया (OFI) और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ नेचुरोपैथी, भारत
- आयुर्वेद और पंचकर्म पर e-CME कोर्स (2011): अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA), भारत
- योग और उसके चिकित्सकीय उपयोग पर CME (2010): राजराजेश्वरी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (RRMCH), भारत
- तनाव की क्रियाविधि और बायोमार्कर पर CME (2009): राजराजेश्वरी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (RRMCH), भारत
- लाइफस्टाइल मेडिसिन में डिप्लोमा (IBLM) (2008): लाइफस्टाइल मेडिसिन अकादमी, भारत
- इंटीग्रेटिव मेडिसिन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा (PGDIM) (2007): सेंटर फ़ॉर हेल्थ मैनेजमेंट एंड रिसर्च, भारत
- इंटीग्रेटेड माइंड-बॉडी फ़िज़ियोलॉजी CME (2005): एसोसिएशन ऑफ़ फिज़ियोलॉजिस्ट्स एंड फ़ार्माकोलॉजिस्ट्स ऑफ़ इंडिया (APPI), भारत
- रेकी (3 स्तर) और एनर्जी हीलिंग में सर्टिफ़िकेट कोर्स (1999): इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ स्किल डेवलपमेंट ट्रेनिंग, भारत
पेशेवर सफ़र
मेरा काम कभी किसी एक भूमिका तक सीमित नहीं रहा। क्लिनिकल प्रैक्टिस के साथ-साथ मैं पढ़ाने, शोध और पेशेवर व सार्वजनिक सेवा से भी जुड़ा रहा हूँ।
क्लिनिकल भूमिकाएँ
- मेडिकल डायरेक्टर, आनंदकुंज, शिवांबु नेचुरोपैथी और योग आश्रम, कोल्हापुर (सितंबर 2002 से)
- संस्थापक निदेशक, संपूर्ण स्वास्थ्य, होलिस्टिक हेल्थ रिट्रीट सेंटर, पुणे (सितंबर 2016 से)
- कंसल्टिंग योग/नेचुरोपैथिक फ़िज़िशियन, आरोग्यधाम, sVYASA
- कंसल्टिंग योग/नेचुरोपैथिक फ़िज़िशियन, लोटस हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर
शैक्षणिक और शिक्षण भूमिकाएँ
- ऑनररी प्रोफ़ेसर, गवर्नमेंट नेचुरोपैथी कॉलेज एंड हॉस्पिटल, कागल (सितंबर 2024 से)
- विज़िटिंग प्रोफ़ेसर, योग एवं बायोसाइंसेज़ विभाग, sVYASA (सितंबर 2002 से)
शोध भूमिकाएँ
- रिसर्च फ़ेलो, योग अनुसंधान विभाग, sVYASA
- रिसर्च डायरेक्टर, KHOJ, सेंटर फ़ॉर रिसर्च इन प्रिवेंटिव एंड इंटीग्रेटिव मेडिसिन
- सचिव, शिवांबु हेल्थ रिसर्च इंस्टीट्यूट
- समीक्षक, इंडियन जर्नल ऑफ़ योगा
पेशेवर और सार्वजनिक सेवा भूमिकाएँ
- सदस्य, गवर्निंग बॉडी, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ नेचुरोपैथी, पुणे, भारत सरकार (2009 से)
- महासचिव, राष्ट्रीय गवर्निंग काउंसिल, इंडियन नेचुरोपैथी एंड योग मेडिकल ग्रेजुएट्स एसोसिएशन (INYGMA)
पंचकोश (फाइव-डाइमेंशनल) दृष्टिकोण
किसी के साथ काम शुरू करते समय मैं सबसे पहले उसकी समस्या, मेडिकल हिस्ट्री, हालात और लक्ष्य समझने की कोशिश करता हूँ। फिर मैं हर समस्या को पंचकोश मॉडल के पाँच आयामों में देखता हूँ: भौतिक शरीर (खान-पान, हलचल, नींद और क्लिनिकल रिपोर्टें), ऊर्जा शरीर (साँस और जीवनशक्ति), मन (तनाव, भावनाएँ और सोचने की आदतें), समझ (अपनी स्थिति को जानना और सोच-समझकर फ़ैसले लेना) और भीतरी शांति (जीवन का उद्देश्य, रिश्ते और मन का सुकून)।
इसके बाद मैं हर आयाम के लिए सही साधन चुनकर एक व्यक्तिगत योजना बनाता हूँ। इसमें लाइफस्टाइल और फंक्शनल मेडिसिन, पोषण, माइंड-बॉडी मेडिसिन, कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी, योग, आयुर्वेद, नेचुरोपैथी, मेडिकल जाँच, रेफ़रल या इनमें से कई का मेल हो सकता है। कोई एक तरीका सबके लिए ठीक नहीं होता।
मेरे काम के कुछ उसूल हैं। मैं सिर्फ़ लक्षण से नहीं, इंसान से शुरुआत करता हूँ। प्रमाण का सम्मान करता हूँ, यह जानते हुए कि सारे प्रमाण एक जैसे पक्के नहीं होते। जीवनशैली की ताक़त पहचानता हूँ: नींद, पोषण, हलचल, तनाव, रिश्ते और रोज़ की दिनचर्या, सब सेहत पर असर डालते हैं। पूरक पद्धतियों का इस्तेमाल सोच-समझकर करता हूँ, क्योंकि उनका सही उपयोग व्यक्ति, पद्धति और हालात पर निर्भर करता है। और अपनी सीमाएँ जानता हूँ। हर समस्या सिर्फ़ जीवनशैली या पूरक तरीकों से नहीं सुलझती, और सुलझानी भी नहीं चाहिए। कुछ में जाँच, निदान, दवा, प्रक्रिया या विशेषज्ञ की देखभाल ज़रूरी होती है।
योग, नेचुरोपैथी, आयुर्वेद, पंचकोश का ढाँचा और दूसरी पारंपरिक या पूरक पद्धतियाँ इस काम का हिस्सा हैं, पर मैं इन्हें ज़रूरी मेडिकल जाँच, निदान या इलाज के विकल्प की तरह कभी पेश नहीं करता। ये सही मेडिकल जाँच के साथ चलती हैं, उसकी जगह नहीं लेतीं।
शैक्षणिक, शोध और शिक्षण योगदान
शोध मेरे पेशेवर सफ़र का एक अहम हिस्सा रहा है। मेरी शैक्षणिक और शोध की रुचियों में ये विषय शामिल रहे हैं: साइकोफ़िज़ियोलॉजी, योग पर आधारित रिलैक्सेशन, P300 और दूसरे इलेक्ट्रोफ़िज़ियोलॉजिकल माप, ऑक्सीजन की खपत और साँस की फ़िज़ियोलॉजी, हार्ट रेट वैरिएबिलिटी (HRV), कॉग्निटिव परफ़ॉर्मेंस और चक्रीय ध्यान।
मेरे डॉक्टरेट शोध ने दो योगिक ध्यान तकनीकों के मनो-शारीरिक प्रभावों की जाँच की, और उसके बाद से मैं शोध, शिक्षण, पेशेवर समीक्षा और शैक्षणिक गतिविधियों से जुड़ा रहा हूँ।
प्रमाण-आधारित और मरीज़-केंद्रित सोच
मैं आधुनिक चिकित्सा और पारंपरिक स्वास्थ्य पद्धतियों को “इसे या उसे चुनो” वाला विकल्प नहीं मानता। आधुनिक चिकित्सा निदान, तीव्र देखभाल और बीमारी के इलाज के ज़रूरी साधन देती है। इंटीग्रेटिव, लाइफस्टाइल और पारंपरिक पद्धतियाँ, जिनमें योग, आयुर्वेद और नेचुरोपैथी शामिल हैं, कुछ और नज़रिए देती हैं, जो सही हालात में सेहत और भलाई को सहारा दे सकते हैं।
मेरी कोशिश यही रहती है कि प्रमाण के बारे में ईमानदार रहूँ, मेडिकल सुरक्षा का सम्मान करूँ और साफ़ बताऊँ कि हर पद्धति कहाँ काम आती है। इस नज़र से इंटीग्रेटिव स्वास्थ्य का मतलब एक पद्धति की जगह दूसरी को रखना नहीं है। इसका मतलब है पूरे इंसान को देखना और सही तरीकों का ज़िम्मेदारी से इस्तेमाल करना।
चुनिंदा पुस्तकें
मैंने स्वास्थ्य और योग साहित्य में लिखा भी है और योगदान भी दिया है:
- जीवनाचा आधार नैसर्गिक आहार
- पंचकोश चिकित्सा
- अष्टांगिक चिकित्सा
