अध्ययन में क्या देखा गया। शोधकर्ताओं ने वयस्कों पर हुए सात रैंडम क्रॉसओवर परीक्षणों को एक साथ जोड़ा। इनमें ज़्यादातर लोगों का वज़न ज़रूरत से ज़्यादा था। अलग-अलग दिनों में इन्हीं लोगों ने या तो लंबे समय तक लगातार बैठे रहना चुना, या बैठने के बीच-बीच में थोड़ी देर खड़े हुए या हल्की सैर की, जैसे हर 20 से 30 मिनट पर दो से पाँच मिनट।
क्या मिला। बैठे रहने की तुलना में खड़े होने और हल्का चलने, दोनों से खाने के बाद ब्लड शुगर कम रही, और चलने का असर ज़्यादा दिखा। इंसुलिन और ब्लड प्रेशर पर असर बहुत कम परीक्षणों में देखा गया था।
इसका मतलब। थोड़ा-थोड़ा, पर बार-बार चलने से शरीर को खाने की शुगर सँभालने में मदद मिल सकती है। यह उसी सीधी सलाह से मेल खाता है कि घंटों बिना उठे बैठे न रहें।
सीमाएँ। हर परीक्षण सिर्फ़ एक दिन का था, समूह छोटे थे और ज़्यादातर प्रतिभागियों का वज़न ज़्यादा था, इसलिए नतीजे हर किसी पर लागू नहीं होते। समीक्षा से यह साबित नहीं होता कि फ़ायदा लंबे समय तक टिकता है, और यह किसी बीमारी का इलाज नहीं है।
स्रोत। Buffey AJ et al., Sports Medicine, 2022. PubMed.
यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है। यह आपके अपने डॉक्टर की सलाह की जगह नहीं लेता।
