अच्छी नींद बिस्तर पर लेटते वक़्त नहीं, शाम को बनना शुरू होती है। कुछ छोटी आदतें, रोज़ दोहराई जाएँ तो, शरीर को बता देती हैं कि दिन अब ख़त्म हो रहा है। सब कुछ अपनाने की ज़रूरत नहीं है। दो-तीन से शुरू कीजिए और हफ़्ते-दो हफ़्ते बाद देखिए कि कैसा लग रहा है।
सोने और उठने का समय एक रखिए
रविवार हो या सोमवार, रोज़ क़रीब-क़रीब एक ही समय पर सोने और उठने से शरीर की घड़ी ठहर जाती है। उठने का ऐसा समय चुनिए जिसे आप निभा सकें, फिर उससे सात-आठ घंटे पीछे गिनकर सोने का समय तय कीजिए।
रोशनी धीमी कीजिए, स्क्रीन दूर रखिए
देर शाम की तेज़ रोशनी दिमाग़ को लगता है कि अभी दिन है। सोने से एक घंटा पहले बत्तियाँ मद्धम कर दीजिए और फ़ोन, टीवी और लैपटॉप को दूर रखने की कोशिश कीजिए। स्क्रीन देखनी ही पड़े तो उसे धीमा रखिए और आँखों से थोड़ा दूर।

हल्का और जल्दी खाइए
सोने के ठीक पहले भारी खाना खाने से बेचैनी और सीने में जलन हो सकती है। कोशिश कीजिए कि रात का खाना सोने से दो-तीन घंटे पहले हो जाए, और वह हल्का और सादा हो। खाने के बाद थोड़ी देर आराम से टहलना दिन को समेटने का अच्छा तरीक़ा है।
मन को टिकने की जगह दीजिए
रात में दिमाग़ दौड़ता रहता हो तो सोने से पहले दो मिनट निकालकर कल के काम और जो बात परेशान कर रही है, काग़ज़ पर लिख दीजिए। फिर कुछ मिनट धीमी साँस लीजिए: नाक से चार गिनती तक साँस भरिए और छह गिनती तक धीरे-धीरे छोड़िए। चक्कर जैसा लगे तो रुक जाइए।
कमरा ठंडा, अँधेरा और शांत रखिए
ज़्यादातर लोगों को ठंडे, अँधेरे और शांत कमरे में बेहतर नींद आती है। पंखा, मोटे परदे या आँखों पर पट्टी इसमें मदद कर सकते हैं। बिस्तर का इस्तेमाल सिर्फ़ सोने के लिए कीजिए। अगर काफ़ी देर से नींद नहीं आ रही, तो थोड़ी देर के लिए उठ जाइए और नींद आने लगे तब वापस आइए।

कैफ़ीन और शराब से सावधान रहिए
चाय, कॉफ़ी, कोल्ड ड्रिंक और कुछ एनर्जी ड्रिंक में कैफ़ीन होती है, जो शरीर में कई घंटे बनी रहती है। नींद की दिक़्क़त हो तो दोपहर के खाने के बाद इनसे बचिए। शराब शुरू में नींद जैसा महसूस करा सकती है, पर रात के आख़िरी हिस्से में नींद तोड़ देती है।
डॉक्टर को कब दिखाएँ
अगर नींद की परेशानी कुछ हफ़्तों से ज़्यादा चल रही है, आप ज़ोर से खर्राटे लेते हैं और बीच में साँस रुकती है, दिन में बहुत नींद आती है, या उदासी और घबराहट रातों पर असर डाल रही है, तो कृपया डॉक्टर से मिलिए। ऐसी तकलीफ़ों के पीछे अक्सर ऐसे कारण होते हैं जिनका इलाज हो सकता है।
यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है। यह आपके अपने डॉक्टर की सलाह की जगह नहीं लेता।
